सत्संग भजन लिरिक्स इन हिंदी | Satsang Bhajan Lyrics in Hindi

भजन “सत्संग भजन लिरिक्स इन हिंदी | Satsang Bhajan Lyrics in Hindi

Satsang Bhajan Lyrics in Hindi

सत्संग भजन लिरिक्स इन हिंदी
Satsang Bhajan Lyrics in Hindi

1. मेरी बहना अब तो भजूंगी हरिनाम सत्संग भजन लिरिक्स

बालापन हँसखेल गवाँ दिया,
मेरी बहना तरुणाई भई है, वे काम, उमर सारी ढर गई।

झूट कपट में ऐसी फँस गई,
मेरी बहना लिया न मैंने हरिनाम, उमर सारी ढर गई।

मानव तन पायौ बड़े भाग्य से,
मेरी बहना भक्ति करूँगी निष्काम, उमर सारी ढर गई।

दौलत यहीं पर रह जायगी,
मेरी बहना साथ न जायेगा छदाम, उमर सारी ढर गई।

महल दुमहले यहीं रह जायेंगे,
मेरी बहना आखिर में देय संग हरिनाम, उमर सारी ढर गई।

स्वाँस स्वाँस में रटूं राम को
मेरी बहना हृदय में बसाऊँ आठौं याम, उमर सारी ढर गई।

महावीर मगन रहें सतसंग में,
मेरी बहना रहत हर्दपुर गाम, उमर सारी ढर गई।

2. बन्दे क्यों भटकत फिरता है सब कर्मों का खेल

वन्दे क्यों भटकत फिरता है सब कर्मों का खेल।
जो तोय जीवन सफल बनाना कर भक्ति से मेल।।

कर्मों से मिलता राजपाट, कर्मों से मिले सुगड़ नारी।
कर्मों से धन दौलत पावै, कर्मों से पुत्र आज्ञाकारी।।

कर्म तराजू के दो पलड़े, तोल सके तो तोल।
सिर धुन-धुन पछतायेगा, ये जीवन मिला अमोल।।

कर्म प्रधान विश्व में वन्दे और सब रहा झमेला।
बिना कर्म के तरत न देखा कोई गुरु कोई चेला।।

खोटे कर्म छोड़ दे वन्दे जो जीवन सफल बनाना।।
जग के सब जंजाल छोड़ के हो भक्ति दीवाना।।।

करुणा कर केशव को भजकर यह जीवन शुद्ध बना ले तू।
काल कुर्की होयगी ये दिल पर भाव जगा ले तू।।

शुद्ध हृदय को कर ले और बुद्धि को निर्मल कर ले।
सदगुरु के पास चला जा तू ज्ञान दीप सागर भर ले।।

अब भी चेतगुमानी क्यों रहा मद में तू इठलाई।
कर्म रेख महावीर मिटे नहीं कर लाखों चतुराई ।।

3. अपनी मुक्ति का तू तो यतन कर ले

अपनी मुक्ति का तू तो यतन कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले।।

बालापन हँस खेल गमायौ।
तरुण भयौ मस्ती में छायौ।
अब तो आदत में परिवर्तन कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

ये काया कुछ काम न आवै।
धन दौलत तेरे साथ न जावै।।
आगे रास्ते को अपने सुगम कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

बड़े भाग्य मानुष तन पायौ।
वादा कर तू प्रभु से आयौ।
अपने वादे पर वन्दे अमल कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

कुटुम कबीला यहीं रह जाएगौ।
बेटा तुझको नाक नचाएगौ।।
अपनी इच्छाओं का दमन कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

अहंकार की छोड़ डगरिया।
माया को तज दे बाबरिया।
महावीर वाणी को अमृतमय कर ले।
रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

4. कर ले तू सतसंग रसपान

कर ले तू सतसंग रसपान प्रभु मेरे दौड़े आयेंगे।
भरोसा कर थोड़ा सा मन में।

प्रभु मेरे मिल जायेंगे छन में।
मन मन्दिर में भाव जगाले अपने धाम बुलायेंगे।
कर ले तू सतसंग रसपान

मोह से दृष्टि हटा ले तू
भावना शुद्ध बना ले तू।
कर ले तू भक्ति रस पान फिर तोय गले लगायेंगे।
कर ले तू सतसंग रसपान

व्यसनों की छोड़ डगरिया।
हरि को भज ले तू बाबरिया।।
बीच भँवर में डूबी नाव तेरी पार लगायेंगे।
कर ले तू सतसंग रसपान

माया साथ न देय निगोड़ी।
भज ले हरी समय रही थोड़ी।
महावीर भूल करे क्यों भारी प्रभु तुझको अपनायेंगे।
कर ले तू सतसंग रसपान

5. ऐरे सतसंग चर्चा से है जाइगो बेढ़ापार

ऐरे सतसंग चर्चा से है जाइगो बेढ़ापार,
तू काहे मन भटकाय रहा

सतसंग चर्चा सुनने से तोय लाभ मिलेगा भारी।
भक्ती रस में डूबक लेने जुड़ रहे नर और नारी।
ऐरे तेरे जीवन का हो जाएगा उद्धार
तू काहे मन भटकाय रहा

काम क्रोध का त्यागन करके ममता दूर भगाले।
अहंकार में मार पटकनी भक्ति माल कमाले।
ऐरे तेरे जीवन का यही है आधार।
तू काहे मन भटकाय रहा

करुणाकर करुणा केशव ने दे दिया मानव चोला।
राम नाम सुमिरन करने को अब तक मुँह नहीं खोला।
ऐरे तू तो भटकेगा जगत में बारम्बार।
तू काहे मन भटकाय रहा

गर्भमास में कौल किया वह तूने नहीं निभायौ।
मैं मेरी में भूल गया तूने राम नाम नहीं गायौ।
ऐरे महावीर पछतायौ तू तो बेसुम्बार।
तू काहे मन भटकाय रहा

6. सतसंग महिमा बड़ी अपार भजन

सतसंग महिमा बड़ी अपार
आज मैं सुनने जाऊँगी।

सतसंग मुक्ति देय दिलाई।
रहे ऋषिमुनी सब गाई।
सुख जायें वे सुम्बार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

सत नाम एक ईश्वर को।
बेडा पार होय जा नर कौ।।
यही है जीवन का आधार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

रहे भक्त सभी ये गाई।
सतसंग से मानव तर जाई।
जाकौ है जाय बेड़ापार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

तर जाओगे चिन्तन से।
अहंकार भगाओ मन से।
महावीर कर रहे काहे अवार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

मोय सतसंग सुनने का चाब भजन लिरिक्स
मोय सतसंग सुनने का चाब,
संग में ले चल साँवरिया।

7. सतसंग की बगिया में जरूर जाऊंगी

सतसंग की बगिया में जरूर जाऊंगी।
ले चलियो मोको साथ में मैं दौड़ी जाऊंगी।।

सभी जगह सतसंग है रहे, मोपै रहयौ न जाए।
भक्ती रस में डुबकी लैवे, मेरौ मन ललचाय।
संत समागम की वाणी में सुन के आऊंगी।
ले चलियो मोको साथ में मैं दौड़ी जाऊंगी

तुलसी बाबा ने सतसंग की महिमा कही अपार।
हृदय लेत हिलोरें मेरौ, हो जाएगा उद्धार।
वेद शास्त्रों के आचरणों को अपनाऊंगी।
ले चलियो मोको साथ में मैं दौड़ी जाऊंगी

राम नाम की चर्चा में, नहीं कछु गाँठ को जाए।
बने भविष्य हमारा संग में, जनम सफल हो जाए।
महावीर मैं मन की बतियाँ कर के आऊंगी।
ले चलियो मोको साथ में मैं दौड़ी जाऊंगी

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