सीता माता की आरती लिरिक्स | Sita Mata Ki Aarti Lyrics

सीता माता की आरती “सीता माता की आरती लिरिक्स | Sita Mata Ki Aarti Lyrics” संजीवनी भिलन्दे जी के द्वारा गयी हुई है। Sita Ji Ki Aarti करने से उनका आशीर्वाद सदा बना रहता है।


सीता माता की आरती लिरिक्स

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ।।

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की।।
सीता जी…।।

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की।।
सीता जी…।।

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ।।
सीता जी…।।

Sita Mata Ki Aarti | सीता माता की आरती

Sita Mata Ki Aarti Lyrics

Aarti Shri Janak Dulari Ki ।
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki ।।

Jagat Janani Jag Ki Vistarini,
Nitya Satya Saket Viharini ।
Param Dayamayi Dinodharini,
Sita Maiya Bhaktan Hitkari Ki ।।
।। Sita Ji Raghuvar Pyari Ki ।।

Sati Shromani Pati Hit Karini,
Pati Seva Vitt Van Van Charini ।
Pati Hit Pati Viyog Savikarini,
Tyag Dharam Murti Dhari Ki ।।
।। Sita Ji Raghuvar Pyari Ki ।।

Vimal Kirti Sab Lokan Chhai,
Naam Let Pawan Mati Aai ।
Sumirat Kaatat Kasth Dukh Daai,
Shrnagat Jan Bhay Hari Ki ।।
।। Sita Ji Raghuvar Pyari Ki ।।


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सीता जी की आरती , सीता माता की आरती।

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