Pitra Paksh Ki Katha


Pitra Paksh Ki Katha

हम पितृ देव महाराज की भक्तो
कथा सुनाते है हम कथा सुनाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से
मुक्त हो जाते है हम कथा सुनाते है

हम पितृ देव महाराज की भक्तो
कथा सुनाते है पावन गाथा सुनाते
सुन इस गाथा को पितृ दोष से
मुक्त हो जाते है हम कथा सुनाते है

ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

श्राद्ध पक्ष में प्रातः उठकर करते सब स्नान
अपने पितरो को फिर देते श्रद्धा से पिंड दान
सोलह दिन इस श्राद्ध पक्ष के है पितरो के नाम
मुक्ति उनको दिलाने का हम करते है ये काम

पितृ पक्ष में करते जो भी अन्न वस्त्रो का दान
पितरो से सब खुशियों का मिल जाता हे वरदान
पितरो के आशीष से कारज बिगड़े बन जाए
कोई भी अनहोनी घर के दर से टल जाए

श्राद्ध के सोलह दिन पूर्वज धरती पे आते है
हम पितृपक्ष की पावन भक्तो
गाथा सुनाते है हम गाथा गाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

पितृ पक्ष से जुडी कथा में आगे बताता हूँ
महाभारत संग क्या है नाता ये समझाता हूँ
युद्ध में वीरगति पाकर ना कर्ण को मुक्ति मिली
सोना चांदी खाने मिले जो भूख थी इनको लगी

दुखी कर्ण ने इंद्र देव से कहा ये जा करके
रत्न आभूषण कोई कैसे रहेगा खा कर के
इंद्र देव बोले तुमने तो यही किया था दान
कभी ना ब्राह्मण को तुमने था किया अन्न का दान

बिन तर्पण के सारे पूर्वज रुष्ट हो जाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से
मुक्त हो जाते है हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

इंद्र से बोला कर्ण प्रभुवर मेरा क्या था दोष
सबने पुकारा सूद पुत्र जब से था संभाला होश
पूर्वज की मुक्ति का उपाय ना किसी ने बतलाया
पिंड दान में उचित विधि से तभी ना कर पाया

अपनी भूल सुधारने को मुझे सोलह दिन दे उधार
कर के अन्न का दान मैं अपनी भूल का कर लू सुधार
वापिस वो धरती पर सोलह दिन के लिए आये
घर में बुलाकर ब्राह्मण को अन्न दान भी कर आये

अन्न के संग वस्त्रो का भी वो दान कर आते है
हम कथा सुनाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

भक्तो वो सोलह दिन पितृ पक्ष के कहलाये
मृत्यु के पश्चात् धरा पर कर्ण थे जो आये
ऐसे ही पूर्वज धरती पर सोलह दिन आते है
कर पूजा तर्पण हम उनको संतुष्ट कर जाते है

श्रद्धा भाव से पितृ पक्ष में जो करता है दान
प्रसन्न हो पूर्वज सब खुशियों का देते वरदान
जो भी सच्चे मन से करते पितरो का सम्मान
जहा रहे पूर्वज वही से रखते सब पर वो ध्यान

इसी तरह पितरो की किरपा हम पा जाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

पितरो से जुडी एक कहानी और सुनाता हूँ
जोगे भोगे दो भाइयो की बात बताता हूँ
बड़ा भाई जोगे था धनवान छोटा भोगे गरीब
बड़ी बहु धन पे इतराती छोटी कोसे नसीब

पितृ पक्ष में जोगे की पत्नी बोली पति से
मायके में भेजू में निमंत्रण आपकी सहमति से
जोगे ने उसे टाल दिया करके कोई बहाना
शुरू किया पत्नी ने उसे खरी खोटी सुनाना

पत्नी के घर वालो को न्योता दे आते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

जोगे की पत्नी ने अपनी देवरानी बुलवाके
कहा तुम बहना करो मदद मेरे घर में आके
भोगे की भोली पत्नी ने कहा सदा था माना
किसके मन में स्वार्थ छिपा है ना उसने कभी जाना

जेठानी की करके मदद सब बना डाले पकवान
देवरानी तब जाने लगी कर खत्म वो अपने काम
जोगे की पत्नी ने कहा ना रुकने को एक बार
भूखी लौट गयी देवरानी अपने घर के द्वार

इसके बाद हुआ क्या आगे हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान
जोगे की पत्नी ने सोचा भोजन में भी पकाऊ

करके अन्न का दान पितरो को संतुष्ट करके आउ
लेकिन देखा नहीं था घर में एक अन्न का दाना
रोने लगी वो सोच के अब में कैसे बनाऊ खाना
करती क्या भोगे की पत्नी वो थी एक दुखियारी

नाम के पितरो की उसने फिर दे दी अग्यारी
जोगे भोगे दोनों के पूर्वज धरा पे आये
पहले पूर्वज बड़ा भाई जोगे के घर में जाए
वहां पे देखा क्या उन्होंने आगे बताते है

सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

जोगे की ससुराल वाले भोजन करने लगे थे
जोगे अपनी पत्नी संग इनकी सेवा में जुटे थे
देख के ऐसा दृश्य पितरो का हुआ बड़ा अपमान
रूठ के सबने तभी वहां से किया जल्द प्रस्थान

भोगे के घर में जब पूर्वज भोजन करने आये
अग्यारी की राख को वो भोजन के स्वरूप में पाए
छोटे भाई की दुर्दशा किसी से ना छुप पायी
बहुत तरस उसकी हालत पर सभी को तब आयी

नदी के तट पर आके सब पूर्वज बतियाते है
सुनके इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

भोगे के भूखे बच्चे जब माँ के पास आते है
ना पा करके भोजन वो रोकर रह जाते है
पूर्वज सोचे इसके संग कुछ ऐसा कर जाए
इसके जीवन से कष्टों के बादल छट जाए

धन नहीं भोगे के घर पर बहुत बड़ा है मन
ऐसे लोगो का रहना नहीं हे उचित निर्धन
उनके आशीर्वाद का जोगे उत्तम फल पाता है
उसके घर में वापिस खुशियों का पल आ जाता है

अन्न भंडार से घर खाली पुरे भर जाते है
सुन इस गाथा को पितृ दोष से मुक्त हो जाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
सब सुनो लगा के ध्यान ये कथा है बड़ी महान

Pitra Paksh Ki Katha

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