Vidya Dadati Vinayam – विद्यां ददाति विनयं

Vidya Dadati Vinayam Lyrics

विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम्॥


Vidya Dadati Vinayam,
Vinayad Yaati Patrataam,
Patratwad Dhanmaapnoti,
Dhanaad Dharamam Tatah Sukham


हिंदी अर्थ (सरलार्थ)

विद्या (मनुष्य को) विनम्रता देती है,
विनय से पात्रता (योग्यता) आती है,
पात्रता (योग्यता) से धन प्राप्त होता है,
धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।

।। भाव ।।

मनुष्य के लिए विद्या यानि ज्ञान उतना ही आवश्यक है जितना खाना पीना व् श्वास लेना।
जिस तरह हम अन्न, पानी और हवा के बगैर जी नहीं सकते उसी प्रकार बिना ज्ञान के जीवन मृत्यु समान है।
विद्या से ही मनुष्य में मनुष्यता आती है और मनुष्य की पहचान व्यक्ति के चरित्र से होती है।
अच्छा चरित्र मानव को आगे बढ़ाता है, दुसरो से जोड़ता है। लोग उसे पसंद करते है। उसे गुणवान बनाते है।
गुणवान व्यक्ति सभी जगह समान्नित होता है। खुद भी सुखी रहता है और दुसरो को भी सुखी रखता है।

इस श्लोक का निष्कर्ष यह है की :
जीवन में सुख का आधार विद्या है। अतः मन लगाकर, अनुशासित रहकर विद्या ग्रहण करना चाहिए।

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