नवरात्री का तीसरा दिन | Navratri 3rd Day

Navratri 3rd Day

शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर, गुरुवार से शुरू हो गए है। नवरात्री का तीसरा दिन (Navratri 3rd Day) माता के स्वरुप “चंद्रघंटा माता” की पूजा आराधना की जाती है।

इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी का यह स्वरूप साहस और वीरता का अहसास कराता है। ये देवी पार्वती का रौद्र रूप हैं।

भोग | Navratri 3rd Day

Navratri 3rd Day को मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है, मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए।  पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए।

नवरात्री स्पेशल माता रानी के भजन लिरिक्स

मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।

माता चंद्रघंटा की कथा

बहुत समय पहले जब असुरों का आतंक बढ़ गया था। तब उन्हें सबक सिखाने के लिए मां दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप में अवतार लिया था। दैत्यों का राजा महिषासुर, राजा इंद्र का सिंहासन हड़पना चाहता था।

जिसके लिए दैत्यों की सेना और देवताओं के बीच में युद्ध छिड़ गई थी।

वह स्वर्ग लोक पर अपना राज कायम करना चाहता था। जिसके वजह से सभी देवता परेशान थे। सभी देवता अपनी परेशानी लेकर त्रिदेवों के पास गए।

देवताओं की बात को सुनने के बाद तीनों को ही क्रोध आया। क्रोध के कारण तीनों के मुख से जो ऊर्जा उत्पन्न हुई। उससे एक देवी उत्पन्न हुईं।

जिन्हें भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने अपना चक्र प्रदान किया। इसी प्रकार अन्य सभी देवी देवताओं ने भी माता को अपना-अपना अस्त्र सौंप दिए। देवराज इंद्र ने देवी को एक घंटा दिया। 

इसके बाद मां चंद्रघंटा महिषासुर का वध करने पहुंची। मां का ये रूप देखकर महिषासुर को ये आभास हो गया कि उसका काल आ गया है।

महिषासुर ने माता रानी पर हमला बोल दिया। मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर दिया। इस प्रकार मां ने देवताओं की रक्षा की।

Chandraghnata Mata Ki Aarti Lyrics

जय चंद्रघंटा माता ।
जय चंद्रघंटा माता ।।

अपने सेवक जन की ,
अपने सेवक जन की ।
शुभ फल की दाता ,
जय चंद्रघंटा माता ।।

नवरात्री के तीसरे दिन ,
चंद्रघंटा माँ का ध्यान ।
मस्तक पर है अर्ध चंद्र ,
मंद मंद मुस्कान ।।

जय चंद्रघंटा माता ।।

अस्त्र शस्त्र है हाथो में ,
और खडग संग बाण ।
घंटे की शक्ति से ,
हरती दुष्टो के प्राण।।

जय चंद्रघंटा माता ।।

सिंह वाहिनी दुर्गा ,
चमके स्वर्ण शरीर ।
करती विपदा शांति ,
हरे भक्त की पीर ।।

जय चंद्रघंटा माता ।।

मधुर वाणी को बोलकर ,
सबको देती ज्ञान ।
जितने देवी देवता ,
सभी करे सम्मान ।।

जय चंद्रघंटा माता ।।

अपने शांत स्वभाव से ,
सबका रखती ध्यान।
भव सागर में फसा हूँ ,
करो माता कल्याण ।।

जय चंद्रघंटा माता ।।

अपने सेवक जन की ,
अपने सेवक जन की ।
शुभ फल की दाता ,
जय चंद्रघंटा माता ।।

अपने सेवक जन की ,
अपने सेवक जन की ।
शुभ फल की दाता ,
जय चंद्रघंटा माता ।।

जय चंद्रघंटा माता ।।


Jai Chandraghanta Mata ।
Jai Chandraghanta Mata ।।

Apne Sevak Jan Ki,
Apne Sevak Jan Ki ।
Shubh Phal Ki Data,
Jai Chandraghanta Mata ।।

Navratri Ke Teesare Din,
Chandraghanta Maa Ka Dhyan ।
Mastak Par Hai Ardha Chandra,
Mand Mand Muskaan ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

Ashatra Shastra Hai Hatho Mein,
Aur Khadag Sang Baan ।
Ghante Ki Shakti Se,
Harti Dushto Ke Praan ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

Singh Vahini Durga,
Chamke Swarna Shareer ।
Karti Vipda Shanti,
Hare Bhakt Ki Peer ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

Madhur Vaani Ko Bolkar,
Sabko Deti Gyaan ।
Jitne Devi Devta ,
Sabhi Kare Samman ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

Apni Shant Swabhav Se,
Sabka Rakhti Dhyan ।
Bhav Sagar Mein Fasa Hu,
Karo Maatu Kalyan ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

Jai Chandraghanta Mata,
Jai Chandraghanta Mata ।
Apne Sevak Jan Ki,
Shubh Phal Ki Data ।।

Jai Chandraghanta Mata ।।

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