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श्री चित्रगुप्त जी की आरती | Shri Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics

श्री चित्रगुप्त जी की आरतीश्री चित्रगुप्त जी की आरती | Shri Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics” सुनने मात्र से होगी सभी इच्छाओ की पूर्ति करने वाली है। Shri Chitragupt Ji Ki Aarti करने से उनका आशीर्वाद सदा बना रहता है।

https://youtube.com/watch?v=Q1IdcBaBk4A

चित्रगुप्त जी की आरती Lyrics

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे ।
भक्त जनों के इच्छित
फल को पूर्ण करे ।।

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,
सन्तन सुखदायी ।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवन यश छायी ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बर राजै ।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वाम अंग राजै ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

कलम, दवात, तलवार , पत्रिका,
कर में अति सोहै ।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवन मन मोहै ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

सिंघासन का कार्य संभाला
ब्रम्हा हर्षाये ।
तैतीस कोटि देवता,
चरनन में ध्याये ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी,
पापपुण्य लिखते ।
हम है शरण तिहारे,
आस ना दूजी करते ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

जो ध्यावे बुद्धि पावे,
बांध मिटे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे,
अहम मिटे तन का ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

इष्ट देव तुम मेरे,
हम भटके जग में ।
मार्ग प्रशस्त बनाओ,
शक्ति भरे मन में ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

जन के तुम ही पितामह,
घट घट के वासी ।
तुम करुणा के सागर,
सत्य नाय दासी ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

तन बल बुद्धि बल पावे,
हो द्रढ़ता मन में ।
शीघ्र शांत विश्वास भरे,
तन मन जीवन में ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

जो जन चित्रगुप्त की आरती,
निशदिन नित्य गावे ।
चौरासी से छूटे,
इच्छित फल पावे ।।
।। ॐ जय चित्रगुप्त हरे ।।

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फलको पूर्ण करे ।।


Shri Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics

Om Jai Chitragupt Hare,
Swami Jai Chitragupt Hare ।
Bhakt Jano Ke Ichchhit,
Phal Ko Puran Kare ।।

Vighn Vinashak Mangalkarta,
Santan Sukhadayi ।
Bhakto Ke Pratipalak,
Tribhuvan Yash Chhayi ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Roop Chaturbhuj, Shyamal Moorat,
Peetambar Rajai ।
Matu Iravati,Dakshina,
Vaam Ang Rajai ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Kalam, Dawat, Talwar, Patrika,
Kar Me Ati Sohei ।
Vaijainti Vanamala,
Tribhuvan Man Mohai ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Singhasan Ka Karya Sambhala,
Bramha Harshaye ।
Taitish Koti Devta,
Charnan Me Dhyaye ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Nyayadhish Vaikunth Niwasi,
Paap Punya Likhte ।
Hum Hai Sharan Tihare,
Aas Na Dooji Karte ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Jo Dhyave Buddhi Paawe,
Bandh Mite Man Ka ।
Sukh Sampati Ghar Aave,
Aham Mite Tan Ka ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Ishth Dev Tum Mere,
Hum Bhatke Jag Me ।
Marg Prashsth Banao,
Shakti Bhare Man Me ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Jan Ke Tum Hi Pitamah,
Ghat Ghat Ke Wasi ।
Tum Karuna Ke Sagar,
Satya Nyay Dasi ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Tan-bal Buddhi-bal,
Ho Dradta Man Me ।
Sighra Shant Vishwas Bhare,
Tan Man Jeevan Me ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Jo Jan Chitragupt Ki Aarti,
Nishdin Nitya Gaave ।
Chorasi Se Chhute,
Ichchit Phal Paave ।।
।। Om Jai Chitragupt Hare ।।

Om Jai Chitragupt Hare,
Swami Jai Chitragupt Hare ।
Bhaktajanon Ke Ichchhit,
Phal Ko Poorn Kare ।।

Shri Chitragupt Ji Ki Aarti

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2 thoughts on “श्री चित्रगुप्त जी की आरती | Shri Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics”

  1. The aarti need to be sung again. The song and the lyrics do not match at many places. Ask the singer to sing again, restricting himself strictly as per the lyrics. No invention is needed from him.

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