यही रात अंतिम यही रात भारी लिरिक्स | Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari Lyrics

रावण की अंतिम रात का यह गीत “यही रात अंतिम यही रात भारी लिरिक्स | Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari Lyrics” रवींद्र जैन, अरुण दांगले और चंद्रानि मुखर्जी का गाया हुआ है। यह गीत रावण की अंतिम रात की व्यथा को स्पष्ट कर रहा है। रावण, श्री राम के बारे में सोच रहा है और राम जी रावण के बारे में। ऐसे ही माता सीता मंदोदरी के बारे म और मंदोदरी, माता सीता के बारे में।


यही रात अंतिम यही रात भारी लिरिक्स

यही रात अंतिम .. यही रात भारी
बस एक रात की अब कहानी है सारी
यही रात अंतिम .. यही रात भारी

नहीं बन्धु बांधव न कोई सहायक
अकेला है लंका में लंका का नायक
सभी रत्न बहुमूल्य रण में गंवाए
लगे घाव ऐसे की भर भी न पाए
दशानन इसी सोच में जागता है
ये जो हो रहा उसका परिणाम क्या है
ये बाज़ी अभी तक न जीती ना हारी

यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..
यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..

हो भगवान मानव तो समझेगा इतना
कि मानव के जीवन में संघर्ष कितना
विजय अंततः धर्म वीरों की होती
पर इतना सहज भी नहीं है ये मोती
बहुत हो चुकि युद्ध में व्यर्थ हानि
पहुँच जाये परिणाम तक अब ये कहानी
वचन पूर्ण हो देवता हों सुखारी

यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..
यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..

समर में सदा एक ही पक्ष जीता
जयी होगी मंदोदरी या कि सीता
किसी मांग से उसकी लाली मिटेगी
कोई एक ही कल सुहागन रहेगी
भला धर्मं से पाप कब तक लड़ेगा
या झुकना पड़ेगा या मिटना पड़ेगा
विचारों में मंदोदरी है बेचारी

यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..
यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..

ये एक रात मानो युगों से बड़ी है
ये सीता के धीरज कि अंतिम कड़ी है
प्रतीक्षा का विष और कितना पिएगी
बिना प्राण के देह कैसे जियेगी
कहे राम रोम अब तो राम आ भी जाओ
दिखाओ दरस अब न इतना रुलाओ
कि रो रो के मर जाए सीता तुम्हारी

यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..
यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..

बस एक रात की अब कहानी है सारी

यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..
यही रात अंतिम .. यही रात भारी ..

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari Lyrics

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari Lyrics

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Bas Ek Raat Ki Kahani Hai Sari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari

Nahi Bandhu Bandhav Na Koi Sahayak
Akela Hai Lanka Me Lanka Ka Nayak
Sabhi Ratna Bahumulya Rad Me Gavaye
Lage Ghav Aise Ki Bhar Bhi Na Paaye
Dashanan Ishi Soch Me Jagata Hai
Ye Jo Ho Raha Hai Usaka Paridam Kya Hai
Ye Baaji Abhi Tak Na Jeeti Na Hari

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari

Ho Bhagavaan Manav To Samjhega Itana
Ki Manav Ke Jeevan Me Sangharsh Kitana
Vijaya Antatah Dharm Veero Ki Hoti
Par Itana Sahaj Bhi Nahi Hai Ye Moti
Bahut Ho Chuki Youdh Me Byarth Hani
Pahuch Jaye Paridaam Tak Ye Kahani
Vachan Purd Ho Devata Hum Sukhari

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari

Samar Me Sada Ek Hi Paksh Jeeta
Jay Hogi Mandodari Ya To Sita
Bishya Maag Se Usaki Lali Mitegi
Koi Ek Hi Kal Suhagan Rahegi
Bhala Dharama Se Paap Kab Tak Ladega
Ya Jhukana Padega Ya Mitana Padega
Bicharo Me Mandodari Hai Bechari

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari

Ye Ek Raat Mano Yugo Se Badi Hai
Ye Sita Ke Dheeraj Ki Antim Ghadi Hai
Pratiksha Ka Bish Aur Kitana Piyegi
Bina Prad Ke Deh Kaise Jiyegi
Kahe Ram Ram Ab Ram Aa To Ram Bhi Jaao
Dikhayo Darash Ab To Na Itana Rulao
Ki Ro Ro Ke Mar Jaaye Sita Tumhari

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari

Bas Ek Raat Ki Ab Kahani Hai Sari

Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari
Yahi Raat Antim Yahi Raat Bhari


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