मिनख जमारो मिल्यो जग माही लिरिक्स | Minakh Jmaaro Milyo Jag Maahi Lyrics

यह अद्बुध हरी भजन “मिनख जमारो मिल्यो जग माही लिरिक्स | Minakh Jmaaro Milyo Jag Maahi Lyrics” Vikash Nathji का है। इस भजन में हरी भक्त भगवन विष्णु के एक बार दर्शन की अभिलाषा व्यक्त कर रहे है।

Minakh Jmaaro Milyo Jag Maahi Lyrics

मिनख जमारो मिल्यो जग मांही,ओर भळे कांई चावे तूं,
लख चोरासी भटकत-भटकत,जूण अनेको भुगत्यो तूं,

मानव तन अनमोल रतन धन,विरथा मत ना खोवे तूं,
रचना रची हरि अजब निराली,भेद कोई नही पायो ते,

कर सत संग सफल कर जीवन,अवसर बीत्यो जावे यूं,
पल-पल छिन-छिन आयु जावे,मोत नेङे री आवे यूं

संचित कर्म पुरबला रे कारण,मानव देह धर आयो तूं
सदानन्द थाने भरी सभा में,बार-बार समझावे यूं

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