ओ गंगा तुम गंगा बहती हो क्यूँ भजन लिरिक्स | Ganga Behti Ho Kyu Bhajan Lyrics

गंगा माता का अति पावन भजन “ओ गंगा तुम गंगा बहती हो क्यूँ भजन लिरिक्स | Ganga Behti Ho Kyu Bhajan Lyrics” – कविता कृष्णमूर्ति जी के द्वारा गाया गया है। इस भजन में गंगा माता की महिमा का बखान किया गया है।


ओ गंगा तुम गंगा बहती हो क्यूँ भजन लिरिक्स

विस्तार है आपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ?

विस्तार है आपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ?

मानो तो मैं गंगा माँ हूँ भजन लिरिक्स

नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई
निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?
॥ विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार..॥

अनपढ़ जन, अक्षरहिन
अनगीन जन, खाद्यविहीन
नेत्रविहीन दिक्षमौन हो क्यूँ ?

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?
॥ विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार..॥

व्यक्ति रहे व्यक्ति केंद्रित
सकल समाज व्यक्तित्व रहित
निष्प्राण समाज को छोड़ती न क्यूँ ?

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?
॥ विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार..॥

रुदस्विनी क्यूँ न रहीं ?
तुम निश्चय चितन नहीं
प्राणों में प्रेरणा देती न क्यूँ ?
उनमद अवमी कुरुक्षेत्रग्रमी
गंगे जननी, नव भारत में
भीष्मरूपी सुतसमरजयी जनती नहीं हो क्यूँ ?
॥ विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार..॥

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार, निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ?

ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम
गंगा तुम, ओ गंगा तुम
गंगा… बहती हो क्यूँ ?

Ganga Behti Ho Kyu Bhajan Lyrics

Ganga Behti Ho Kyu Bhajan Lyrics

Vistar Hai Apar, Praja Donon Par
Kare Hahakar Nihshabd Sada
O Ganga Tum, Ganga Bahati Ho Kyun?

Vistar Hai Apar, Praja Donon Par
Kare Hahakar Nihshabd Sada
O Ganga Tum, Ganga Behti Ho Kyu?

Naitikta Nasht Hui, Manavta Bhrasht Hui
Nirlajj Bhav Se Bahati Ho Kyun ?
Itihas Ki Pukar, Kare Hunkar
O Ganga Ki Dhar, Nirbal Jan Ko
Sabal-sangrami, Samgrogami
Banati Nahin Ho Kyun ?
॥ Vistar Hai Apar, Praja Donon Par.. ॥

Anpadh Jan, Aksharhin
Angin Jan, Khadyavihin
Netravihin Dikshamaun Ho Kyun ?

Itihas Ki Pukar, Kare Hunkar
O Ganga Ki Dhar, Nirbal Jan Ko
Sabal-sangrami, Samgrogami
Banati Nahin Ho Kyun ?
॥ Vistar Hai Apar, Praja Donon Par.. ॥

Vyakti Rahe Vyakti Kendrit
Sakal Samaj Vyaktitv Rahit
Nishpran Samaj Ko Chhodati Na Kyun ?

Itihas Ki Pukar, Kare Hunkar
O Ganga Ki Dhar, Nirbal Jan Ko
Sabal-sangrami, Samgrogami
Banati Nahin Ho Kyun ?
॥ Vistar Hai Apar, Praja Donon Par.. ॥

Rudsvini Kyun Na Rahin ?
Tum Nishchay Chitan Nahin
Pranon Mein Prerana Deti Na Kyun ?
Unamad Avami Kurukshetragrami
Gange Janani, Nav Bharat Mein
Bhishmrupi Sutsamarajayi Janati Nahin Ho Kyun ?
॥ Vistar Hai Apar, Praja Donon Par.. ॥

Vistar Hai Apar, Praja Donon Par
Kare Hahakar, Nihshabd Sada
O Ganga Tum, Ganga Bahati Ho Kyun?

O Ganga Tum, O Ganga Tum
Ganga Tum, O Ganga Tum
Ganga Behti Ho Kyu ?


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