बेद की औषद खाइ कछु न करै माहात्म्य लिरिक्स | Bed Ki Aushad Khai Kachhu Na kare Ganga Mahatmy Lyrics

गंगा माता का माहात्म्य “बेद की औषद खाइ कछु न करै माहात्म्य लिरिक्स | Bed Ki Aushad Khai Kachhu Na kare Ganga Mahatmy Lyrics” – इब्राहिम खान जी के द्वारा गाया गया है। इस भजन में गंगा माता की महिमा का बखान किया गया है।


बेद की औषद खाइ कछु न करै माहात्म्य लिरिक्स

माँ गंगा मैया का गरिमामय माहात्म्य ॥

बेद की औषद खाइ कछु न करै बहु संजम री सुनि मोसें ।
तो जलापान कियौ रसखानि सजीवन जानि लियो रस तेर्तृ ।
एरी सुघामई भागीरथी नित पथ्य अपथ्य बने तोहिं पोसे ।
आक धतूरो चाबत फिरे विष खात फिरै सिव तेऐ भरोसें ।

Bed Ki Aushad Khai Kachhu Na kare Ganga Mahatmy Lyrics


Bed Ki Aushad Khai Kachhu Na kare Ganga Mahatmy Lyrics

Bed Ki Aushad Khai Kachhu Na Karai Bahu Sanjam Ri Suni Mosen ।
To Jalpan Kiyau Rasakhani Sajeevan Jaani Liyo Ras Tertr ।
Eri Sudhamayi Bhageerathi Nit Pathy Apathy Bane Tohin Pose ।
Aak Dhaturo Chaabat Phire Vish Khaat Phirai Siv Teai Bharosen ।


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