जगदीश ज्ञानदाता सुख मूल लिरिक्स | Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics

यह अद्बुध हरी भजन “जगदीश ज्ञानदाता सुख मूल लिरिक्स | Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics” हरी भक्त का गाया हुआ है। इस भजन में हरी भक्त भगवन विष्णु के एक बार दर्शन की अभिलाषा व्यक्त कर रहे है।


जगदीश ज्ञानदाता सुख मूल लिरिक्स

जगदीश ज्ञानदाता सुख-मूल, शोक-हारी ।
भगवान तुम सदा हो निष्पक्ष न्यायकारी ।।

सब काल सर्वज्ञाता सविता पिता विधाता ।
सबमें रमे हुए हो तुम विश्व के बिहारी ।।

कर दो बलिष्ठ आत्मा, घबरा न जाएँ दुःख से ।
कठिनाइयों का जिससे, तर जाएँ सिंधु भारी ।।

निश्चित दया करोगे, हम माँगते यही हैं ।
हमको मिले स्वयं ही, उठने की शक्ति सारी ।।

Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics

Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics

Jagdish Gyandata Sukh Mul Khol Hari ।
Bhagwan Tum Sada Ho Nishpaksh Nyaykari ।।

Sab Kal Sarvgyata Savita Pita Dhata ।
Sabme Rame Huye Ho Tum Vishav Ke Bihari ।।

Kar Do Balisth Aatma Ghabra Na Jaye Dukh Se ।
Kathnaiyo Ka Jisme Tar Jaye Sindhu Bhari ।।

Nishit Daya Karoge Hum Mangte Yahi Hai ।
Humko Mile Syam Hi Uthne Ki Shakti Sari ।।


हमें उम्मीद है की भगवान विष्णु के भक्तो को यह आर्टिकल “जगदीश ज्ञानदाता सुख मूल लिरिक्स | Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics” + Video + Audio बहुत पसंद आया होगा। “Jagdesh Gyandata Sukh Mul Lyrics” भजन के बारे में आपके क्या विचार है वो हमे कमेंट करके अवश्य बताये। आप अपनी फरमाइश भी हमे कमेंट करके बता सकते है। हम वो भजन, आरती आदि जल्द से जल्द लाने को कोशिश करेंगे।

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