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व्रत बड़ो नर एकादशी को लिरिक्स | Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics

यह अद्बुध एकादशी भजनव्रत बड़ो नर एकादशी को लिरिक्स | Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics” भक्त का गाया हुआ है। इस भजन में हरी भक्त भगवन विष्णु के एक बार दर्शन की अभिलाषा व्यक्त कर रहे है।


Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics

व्रत बड़ो है एकादशी को,
हरी के नाम बिना मुक्ति नहीं,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

जल में नाहवे जल में धोवे,
जल में कुल्ला जो करतो,
या करनी से बन्यो रे मींडको
टरड टरड करतो फिरतो,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

नदी किनारे मुंडो धोवे
पर नारी चित जो धरतो,
या करनी से बन्यो रे गधेड़ो
बोझा ढोतो वो फिरतो,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

उठ सवेरे चुगली करती
सात घरा में जो फिरती,
या करनी से बनी रे कुकरी
घर घर टुकड़ा वा खाती,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

छुप छुप जो बाता सुनती
ऐसी नर को कई करसी,
या करनी से बन्यो रे छिपकली
भीत दीवार पर वा चिपकी,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी
जोड़ जमीन में जो धरतो,
या करनी से बन्यो रे सपोला
पेट रगड़ के वो चलतो,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

ग्यारस के दिन माथो धोतो
बाल सवारती जो फिरती,
या करनी से बनी रे भूतनी
बड़ पीपल में वा रहती,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

कहत कबीर सुनो भाई साधो
जाकी करणी वो भरतो,
चौकी करनी कर महारा मनवा
फेर जनम तू कब पावे,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

व्रत बड़ो है एकादशी को,
हरी के नाम बिना मुक्ति नहीं,
व्रत बड़ो है एकादशी को…

Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics

हमें उम्मीद है की भगवान विष्णु के भक्तो को यह आर्टिकल “व्रत बड़ो नर एकादशी को लिरिक्स | Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics” + Video + Audio बहुत पसंद आया होगा। “Vrat Bado Nar Ekadashi Ko Lyrics” भजन के बारे में आपके क्या विचार है वो हमे कमेंट करके अवश्य बताये। आप अपनी फरमाइश भी हमे कमेंट करके बता सकते है। हम वो भजन, आरती आदि जल्द से जल्द लाने को कोशिश करेंगे।

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