चन्द्र देव की आरती लिरिक्स | Chandra Dev Aarti Lyrics

चन्द्र देव की आरती “चन्द्र देव की आरती लिरिक्स | Chandra Dev Aarti Lyrics” Anjali Jain,Namita Jain,Anubhav Kapil के द्वारा गायी हुई है। आरती के लिरिक्स हिंदी और इंग्लिश में वीडियो के साथ दिए हुए है।

चन्द्र देव की आरती लिरिक्स

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।

दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।

प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।

धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।

सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।

चन्द्र देव आरती लिरिक्स

जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा l
आरती ओंवाळू पदिं ठेवुनि माथा ll धृ.ll

उदयीं तुझ्या हृदयीं शीतळता उपजे l
हेलावुनि क्षीराब्धी आनंदे  गर्जे l
विकसित कुमुदिनी देखुनि मनही बहु रंजे l
चकोर नृत्य करिती अदभुत सुख माजे  ll
जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा ll

विशेष महिमा तुझा न कळे कोणासी  l
त्रिभुवनिं द्वादशीराशी व्यापुनि राहसी l
नवही ग्रहांमध्यें  उत्तम आहेसी l
तुझे बळ वांछीती  सकळहि कार्यासी ll
जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा ll

शंकरगणनाथादिक भूषण मिरवीती l
भाळी मौळी तुजला संतोषे धरिती l
संकटनामचतुर्थीस रूपजन जे करिती l
संतत्ती संपत्ति अंती भवसागर तरती  ll
जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा ll

केवळ अमृतरूप अनुपम्य वळ्सी l
स्थावर जंगम यांचें जीवन आहेसी l
प्रकाश अवलोकितां मन हे उल्हासी l
प्रसन्न होउनि आतां लावी निजकांसी ll
जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा ll

सिंधूतनया बिंदू इंदू श्रीयेचा l
सुकर्तिदायक नायक उड्डगण  यांचा l
कुरंगवाहन चंद्र अनुचित हे वाचा l
गोसावीसुत विनवी वर दे मज साचा ll
जय देव जय देव श्रीशाशिनाथा ll

Chandra Dev Aarti Lyrics

Jay dev jay dev shri shashinatha l
Aarti ovalu padi thevuni matha ll Dhru.ll

Udayi Tujhya hridayi sheetalta upje l
Helavuni shirabdhi anande garje l
Viksit kumudini dekhuni manhi bahu ranje l
Chakor nrutya kariti adbhut sukh maje ll
Jay dev jay dev shri shashinatha ll

Vishesh mahima tujhya ne kale konasi l
Tribhuvani dwadshirashi vyapuni rahasi l
Navhi grahanmadhye uttam ahesi l
Tujhe baal vaanchiti sakalhi karyasi ll
Jay dev jay dev shri shashinatha ll

Shankargannathadhik bhushan mirviti l
Bhaali mauli tujla santoshe dhiriti l
Sankatnamchaturthis roopjan je kariti l
Santati sampati anti bhavsagar tarti ll
Jay dev jay dev shri shashinatha ll

Keval amrutroop anupamya valsi l
Sthavar jangam yanche jeevan ahesi l
Prakash avlokita man he ulhasi l
Prasann houni ata lavi nijkansi ll
Jay dev jay dev shri shashinatha ll

Sindhutanaya bindu indu shriyecha l
Sukirtidayak nayak uddgan yancha l
Kurangvahan Chandra anuchit he vacha l
Gosavisut vinvi var de maj saacha ll
Jay dev jay dev shri shashinatha ll

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